दहेज गाथा- Blog post by Amit Kumar Gautam | Best hindi dowry poem | dahej gatha

 


शादी के जब बात चलति है, एकुई बात सुनै मिलति है
सास का चाही कलर टीवी, ससुर मांगै फटफटिया

लरिका रहत विदेश मा, मांगत है चरिपहिया।।
सासु कहय लड़की के सौ गुन, ससुर कहय लक्ष्मी है
अगर मिला दहेजु तो, ननदों कहय अच्छी है।।
सासु न बइठे बिन टीवी के, उनका कुछो न सोहाय
छुटै जो एक्को सीरियल, बहुरिया का खूब चिल्लांय।।
ससुर चलै न बिन गाड़ी के, चाहे कुछौ होई जाय
अब काहे का टेंशन है, जब बहुिरया रही कमाय।।
शादी के पबहे रहय कमासुत, अब होइगे घरबइठा
दारु पीकै आवै घरै, सबते रहय वहु अइठां-अइठां।।
पांय रहय चरिपहिया जब बहुतै वाहवाही कमाइन
बेंचि के चरिपहिया सब पइसन के दारु उड़ाइन।।
अब फूटी कौड़ी नहिंन चली तो, मेहरीवा ते मांगति है
मेहरीवा कहय अब तो सुधरौ का तुमका शर्म नहीं आवति है।।
शर्म जो होति हमरे अन्दर, काहेक हम मांगति दहेज
इज्जत पावैक है अगर तो तुमहुं करौ यहिते परहेज।।।।



नोट- आपको यह अवधी कविता कैसी लगी, कमेंट बाक्स में जरुर बताएं। 🙏🙏🙏

आपका अमित

Post a Comment

0 Comments