मेरा गांव मेरा घर- Blog post by Amit Kumar Gautam | Best hindi village story| My Village My House

     आइए आज आपको रुबरु करवाते है अपने गांव से, पीपल की ठण्डी छांव से। इस भाग दौड़ से भरी जिंदगी से थोड़ा समय निकालकर चलिए आज मेरे साथ मेरे गांव की सैर पर। यह कहानी मैंने सन् 2011 के दिसम्बर महीने में लिखी थी तो फिर शुरु करते है.........






गांव प्रकृति का सबसे सुन्दर आइना होता है जहां चारो तरफ सुन्दर नजारे होते है। गांव में व्यक्ति अपनी दिनचर्या सुबह जल्दी शुरु होती है और शाम को जल्दी खत्म हो जाती है। हरियाली के बीच और खुली हवा में सांस लेने का जो मजा गांव में है वो शहर में नहीं है। अक्सर गर्मियों में बहुत से लोग गांव में छुट्टी बिताने आते है। मेरे गांव के बगल में एक नदी बहती है जिसका पानी बहुत ही निर्मल है और पानी में रंग-बिरंगी मछलियां अठखेलियां करती है। नदी से निकली हुई नहर के दोनो तरफ हरे-भरे खेत है जो नजारा सिर्फ देखते ही बनता है। हमारे खेतों पर एक ट्यूबवेल लगा है जिसका पानी बहुत ही शीतल है। मेरा घर गांव के बीचोबीच बना है शहर जाती सड़क से मेरे घर तक खड़ंजा लगा हुआ है। मै हर रोज साइकिल से स्कूल जाता हूं मेरा भाई इण्टर में पढ़ता है वह मुझसे दो साल बड़ा है। मैं उसे प्यार से वीरु कहता हूं और वह मुझे प्यार से जय कहता है। हम दोनो भाई सुबह चार बजे उठते और दौड़ने जाते। दौड़ने के बाद खेतों पर घूमने जाते और फिर वापस आकर नहा-धोकर स्कूल चले जाते। स्कूल में हम लोग खूब मन लगाकर पढ़ते है। उस दिन जब स्कूल से शाम को घर आये तो पता चला कि आज चाचा जी का फोन आया था और वो लोग कल शहर से गांव छुट्टी मनाने आ रहे है। हमने जैसे ही यह खबर सुनी तो ''याहू'' का जोरदार नारा लगाया। क्योंकि हमारी भी स्कूल की छुट्टियां हो गई थी। हम लोग सुबह से बहुत उत्साहित थे दोपहर तक बस स्टेशन पहुंच गये और चाचा जी का इंतजार करने लगे। लेकिन शाम हो जाने पर भी चाचा जी नहीं आये तो हमें लगा कि शायद चाचा जी कल आये और हम लोग घर आने लगे तभी पीछे से एक दहाड़ती हुई आवाज हमारे कानों में पड़ी "रुको", हमने पीछे पलटकर देखा तो चाचा सिर पर टोपी आर्मी की वर्दी और हाथ में कंधे में बंदूक लटकाये मेरे चाच जी और साथ में चाची जी और उनके बच्चे बबलू और रेखा खड़े थे। हमने दौड़कर चाचा और चाची जी के चरण स्पर्श किए और घोड़ागाड़ी से घर आ गये। सब लोग एक-दूसरे से गले मिल रहे थे और हाल-चाल पूंछ रहे थे। शाम के भोजन में अरहर की दाल, चावल और बेसन की रोटी सभी ने जी भरकर खायी। खाने के बाद सभी ने एक-एक गिलास ताजी छांछ पिया लेकिन बबलू और रेखा ने नहीं पिया। चाची जी ने कहा इनको आदत नहीं है। तब दादी बोल पड़ी 'शहर में अच्छी चीजों की आदत नहीं होती' सब लोग हंसने लगे। थोड़ी देर बाद सब लोग सो गये। सुबह सबसे पहले मैं उठा फिर भाई को जगाने लगा तो चाचा जी की नींद खुल गयी। फिर चाचा जी भी हमारे साथ चल दिए। चाचा जी ने हमसे पूंछा बड़े होकर क्या बनना चाहते हो। हम लोगों ने एक साथ उत्तर दिया कि हम भी आपकी तरह फौज में भर्ती होना चाहते है। चाचा जी हमारी बात सुनकर खुश हुए और हमारी पीठ थपथपाई। जब हम लोग सैर करके वापस घर आये तो पता चला कि नाश्ते में आलू के पराठे बने है। मैंने जल्दी-जल्दी से मुंह धोया क्योंकि मुझे आलू के पराठे बहुत पसंद है। मैंने नाश्ते की टेबल पर धावा बोल दिया। शाम को सब लोग सब लोग पैदल ही गांव की सैर पर निकल पड़े। सबसे पहले हम लोग नदी के किनारे घूमने गये। नदी शोर करती हुई अपनी मस्ती से बह रही थी। हम लोगो ने नाव में बैठकर नदी मे सैर करने गये। बबलू और रेखा बहुत डर रहे थे इसलिए उन्हे सबसे बीच में बिठाया गया और उनके बगल मे चाचा-चाची को बैठना पड़ा।



नाव जरा भी हिचकोले लेती तो बबलू के मुंह से चीख निकल जाती। नाव से उतरकर हम लोग नती के किनारे रेत पर घूमने लगे फिर अचानक मन्दिर की घण्टियों की आवाज कानों में पड़ने लगी शायद मन्दिर में पूजा हो रही था। मन्दिर के बारे में एक जनश्रुति है कि एक बार रसिया नाम का आदमी जो कि बहुत गरीब था अपने मवेशियों को चरा था तो उसने देखा कि अचानक एक बन्दर आम के पेड़ से नीचे गिरा। जब उसने पास जाकर देखा तो बंदर के सर से खून निकल रहा था वह बेहोश हो गया था। उसने जब बंदर को ऐसी हालत में देखा तो उसे उठाकर अपने घर ले गया और उसका इलाज किया। कुछ दिन बाद बंदर ठीक हो गया तो वह कहीं नहीं गया बल्कि उसी के साथ रहने लगा। एक दिन बंदर उसका हाथ पकड़कर उसी पेड़ के नीचे ले गया और एक जगह हाथ से मिट्टी हटाने लगा। रसिया ने वहां पर खुदाई की तो उसे सोने-चांदी से भरा एक कलश मिला फिर उसी आदमी ने वहां पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर में जो भी मन्नत मांगो वह पूरी होती ऐसा लोग कहते है। मन्दिर से घूमकर हम लोग आम के बाग से होकर गुजरे। वहां पर बैठे बुधई काका ने हम लोगो को जी भरकर आम-अमरुद खिलाएं। आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा था क्योकि आज पूरा परिवार साथ में था और ढेर सारी सैर की। 

 

    नोट- आप लोगो को यह कहानी कैसी लगी कमेंट सेक्शन में जरुर बताएं।

आपका अमित

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