पिंजरा- blog post by Amit Kumar Gautam | best hindi story | pinjra

सभी प्रिय पाठकों को मेरा नमस्कार। आज आपके लिए लाए है एक ऐसी कहानी जिसमें भावनाएं है,  दोस्ती है और त्याग भी है। कहानी के पात्र को जन्मदिन के मौके पर एक तोता उपहार मे दिया जाता है जिसको पाकर वह बहुत खुश होता है लेकिन फिर उसने तोते को आजाद कर दिया और फिर उसकी तोते के साथ पक्की वाली दोस्ती हो गई। आइये पढ़ते है एक लड़के और तोते की दोस्ती की कहानी। 

source- internet


    विद्यालय की छुट्टी होने में अभी 30 मिनट बाकी थे। मेरा ध्यान घड़ी की सुइयों की तरफ था जो बहुत धीमी गति से चल रही थी जैसे ही विद्यालय में छुट्टी की घण्टी बजी, मेरे पैर सीधे विद्यालय से निकलकर घर की तरफ तेजी से मुड़ गये। क्योंकि आज मेरा जन्मदिन था और पापा मेरे लिए तोहफा लाने वाले थे। विद्यालय से घर पहुंचने में देर न लगी, दूर से देखा तो दादा जी चारपाई पर बैठे थे मुझे देखकर मुस्कुराने लगे। उनकी मुस्कुराहट देखकर मैं समझ गया और सीधे आंगन में पहुंच गया। मां आंगन से लगे बरामदे के पास खड़ी थी। मुझे देखा तो हल्की सी मुस्कुराहट के साथ एक तरफ हाथ से इशारा कर दिया। मैंने देखा बरामदे के दांयी तरफ एक पिंजरा टंगा हुआ है और जिसमें एक प्यारा सा तोता था। मैं पिंजरे की तरफ दौड़ पड़ा। मां ने कहा- हाथ-मुंह धो लो, खाना लगा देती हूं। लेकिन मुझे मां की बात सुनाई ही नहीं पड़ रही थी। स्कूल बैग अभी भी मेरे कंधे पर था और मैं पिंजरे के पास खड़ा था। उसका रंग रहा था और चोंच लाल थी। पिंजरे में इधर-उधर उछल रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं एकटक उसको देख रहा था कि अचानक मां मेरे पास आई और सर पर राथ फेरते हुए पूंछा- क्या तोहफा तुम्हें पसंद आया? मैंने प्रसन्नतापूर्वक हां में सिर हिला दिया। मां ने कहा- अच्छा! चलो पहले खाना खालो फिर इसके साथ खेलना। खाना खत्म करने के बाद मैं उसका पिंजरा आंगन में उठा लाया और उसके साथ खेलने लगा। मां ने बताया कि यह हमारी तरह बोल भी सकता है और खाना भी खाता है लेकिन इसे सबसे ज्यादा हरी मिर्च पसंद है। मैं घर के पीछे बगीचे से हरी मिर्ची तोड़ लाया और उसको खाने को दी। उसने मिर्ची को पंजे से पकड़ लिया और चोंच से खाने लगा। मैंने उसका नाम "मिठ्ठू" रख दिया। शाम को जब पापा आये तो मैं दौड़कर उनकी गोद में बैठ गया। मुझे हंसता देखकर कहने लगे, "लगता है तुम्हे तोहफा बहुत पसंद आया।" मैंने हामी भर दी। सुबह जब मेरी नींद खुली तो देखा कि मिठ्ठू पिंजड़े में इधर-उधर उछलकर शोर कर रहा था। मैंने सोचा शायद मिठ्ठू भूखा है तो उसकी कटोरियों में खाना और पानी रख दिया। वह चुपचाप खाने लगा है फिर मैं तैयार होकर विद्यालय चला गया और शाम को आया तो मिठ्ठू मुझे देखकर फिर पिंजड़े में इधर-उधर उछलने लगा। ऐसा लग रहा था मानो वह मुझे देखकर खुश हो गया हो। अब हर रोज विद्यालय से लौटने के बाद बाकी समय मिठ्ठू के साथ बिताता।

source- internet


    
 एक दिन शाम को विद्यालय से आने के बाद मैं मिठ्ठू के पिंजड़े को लेकर बगीचे में गया। वहां काफी ठण्डी हवा चल रही थी। पेड़ो पर भांति-भांति के पक्षी चहक रहे थे। मिठ्ठू चुपचाप उन पक्षियों की तरफ एकटक देखने लगा। उसका चेहरा उदास और पलकें भारी हो गयी थी। शायद वह भी उन पक्षियों की भांति उड़ना चाहता था। लेकिन वह तो पिंजड़े में था। इसीलिए शून्य निगाहों से उन पक्षियों की तरफ देख रहा था। शाम को मिठ्ठू ने खाना भी नहीं खाया। वह चुपचाप बेसुध सा बैठा रहा। मुझे रात में नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मिठ्ठू ने खाना भी नहीं खाया, वह उदास था। सुबह होते ही मैं मिठ्ठू के पिंजड़े को लेकर बगीचे में पहुंच गया और पिंजड़े का दरवाजा खोल दिया। पिंजड़े का दरवाजा खुला देखकर वह पिंजड़े से बाहर निकला और फुर्र से उड़ गया। मैं मायूस होकर घर आया फिर विद्यालय चला गया। शाम को विद्यालय से आकर मैं बगीचे में जाकर बैठ गया। मैं आंखे बंद करके मिठ्ठू को याद करने लगा तभी अचानक फड़फड़ाते हुए कोई कंधे पर आकर बैठ गया। मैंने आंखे खोली तो वह मिठ्ठू थाओ मिठ्ठू को अपने पास फिर से देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने प्यार से उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा और फिर कभी मिठ्ठू को पिंजड़े में बंद नहीं किया। वह बगीचे में ही रहने लगा।


अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट बाक्स में अपना अनुभव साझा करें।

आपका अमित




Post a Comment

0 Comments