मेला का इतिहास बहुत पुराना है। हमारे देश में बहुत से हर साल हजारों मेले लगते है। लेकिन कुंभ का मेला सिर्फ देश का ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा मेला है। बचपन में मेला देखने का शौक हर बच्चे को होता है। उत्तर प्रदेश के एक गांव में शीनू नाम का लड़का रहता था उसे भी मेला देखने का शौक था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सब लोग सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करने जाते है और लौटते हुए मेला घूमते है। शीनू भी बहुत खुश था क्योंकि वह भी अपने पिता जी के साथ मेला घूमने जा रहा था। उसके पिता जी उसे साइकिल में बैठाकर ले गये।
शीनू बड़े उत्साह के साथ साइकिल में बैठकर गंगा नदी पर पहुंचा। वहां पर स्नान के लिए बहुत भीड़ थी। शीनू को सुबह-सुबह स्नान करना अच्छा नहीं लगता था लेकिन मेला देखने के उसने जल्दी-जल्दी डुबकी लगाई। अब शीनू मन ही मन मेले के बारे में सोचकर खुश हो रहा था। शीनू सोचते-सोचते कब मेले तक पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला। मेले में बड़े-बड़े झूलें, मिठाईयां और ढेर सारे खिलौने थे। झूलों पर झूलते हुए बच्चों को देखकर शीनू बहुत खुश हुआ। मिठाई वाला जोर-शोर से जलेबी, बर्फी व पेड़ा बेंच रहा था। मिठाई देखकर शीनू को भूख लग गयी लेकिन उसने गुब्बारे देखे तो वह पिताजी से गुब्बारे लेने की जिद करने लगा। पिताजी ने उसे गुब्बारे लेकर दिए। ज्यादा भीड़ की वजह से गुब्बारे लेकर चलने में शीनू को दिक्कत हो रही थी। अचानक शीनू का हाथ अपने पिताजी के हाथ से छूट गया। वह भीड़ में अपने पिताजी को ढूढ़ने लगा, लेकिन वह अपने पिताजी से अलग हो गया। अब शीनू को चारो तरफ सिर्फ भीड़ ही भीड़ दिखाई दे रही थी। शीनू रोने लगा वहीं थोड़ी दूर पर उसने देखा कि एक मदारी बंदर का खेल दिखा रहा था। शीनू को गुलाटी मारते हुए बंदर का खेल बहुत अच्छा लगा। वह बेफिक्र होकर बंदर के करतब देख रहा था बंदर कभी छलांग लगाता, कभी आग के गोले के बीच से कूदता। यह सब देखकर शीनू भीड़ के साथ खुश होकर जोर-जोर से ताली बजा रहा था। जब खेल खत्म हुआ तब शीनू को अपने पिताजी की याद आई। शीनू फिर से रोने लगा और मेले में चारो तरफ उन्हें ढूढ़ने लगा। अचानक शीनू का पैर फिसला और वह कीचड़ में गिर गया। शीनू ऊपर से नीचे तक कीचड़ में सन गया। शीनू के गुब्बारे भी फूट गये था शीनू घर जाना चाहता था लेकिन उसे घर का रास्ता नहीं मालूम था। शीनू के पिताजी भी शीनू को ढूढ़ रहे थे। कीचड़ में सने होने के कारण कोई भी दुकानदार शीनू को अपनी दुकान के पास भी नहीं आने दे रहा था। थोड़ी देर में शीनू ने भीड़ में अपने पिताजी को देखा। पिताजी को देखकर शीनू दौड़कर अपने पिताजी से लिपट गया। शीनू के पिताजी ने शीनू को कीचड़ में सने होने के कारण पहचाना नहीं और शीनू को झटक दिया। शीनू को पिताजी की यह बेरुखी अच्छी नहीं लगी और शीनू दहाड़े मारकर रोने लगा। शीनू इतना रोया कि उसके चेहरे का कीचड़ धुल गया। शीनू के पिताजी को अपनी गलती पर पछतावा हुआ और शीनू को घुटनों के बल बैठकर अपने गले से लगा लिया। शीनू का कीचड़ साफ किया और शीनू के लिए ढेर सारे खिलौने लेकर खुशी-खुशी घर आ गये।
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आपका अमित

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