दिल्ली के गिरधारी- Blog Post by Amit Kumar Gautam| best hindi poem | dilli ke girdhari

                     (भ्रष्टाचार का दरबार)



भ्रष्टाचार का लगा दरबार, भ्रष्ट सभी दरबारी है।

रुप बदलकर घूम रहे जो, दिल्ली के गिरधारी है।

एक फरियादी पहुंचा दरबार, पूंछा उससे क्या करते हो यार

बोला हुजूर दिन भर मजदूरी करते है. बड़ी मुश्किल से बच्चो का पेट भरते है

उनमें से एक ने हाथ उठाया और इशारे से उसको बुलाया

कान में उसके एक बात कही, सुनकर उसको सुध न रही

फरियादी बोला साहब क्या कहते हो, भगवान से क्यों नहीं डरते हो

साहब बोले सुनो फरियादी, इसमें काहे की हैरानी 

आज कोई काम करवाना है तो दरबार में भेंट चढ़ाना है।

सुनकर उस अफसर की बाते, फट गई फरियादी की आंखे

बन ठन कर जो बैठे सूट-बूट में, सबसे बड़े भिखारी है।

रुप बदलकर के घूम रहे जो, दिल्ली के गिरधारी है। 


प्रिय पाठकों, आपके कीमती विचार स्वागत योग्य है।

आपका अमित

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