बहुत दिनों के बाद ऐसी फिल्म देखने को मिली जो अपने नाम की तरह ही ईमानदारी से फिल्माई भी गई है। फिल्म की कहानी से लेकर पृष्ठभूमि तक सब बेहतरीन है। यह फिल्म पूरे दावे के साथ कहती है कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं बनती है फिल्मों से हम एक अच्छे समाज का निर्माण भी कर सकते है। जय भीम फिल्म विश्व की बेहतरीन सामाजिक संदेश वाली फिल्मों में अलग स्थान रखती है। जब आप फिल्म को देखना शुरु करते है तब से जब तक फिल्म खत्म नहीं हो जाती तब तक आप अपनी नजरें फिल्म से हटा नहीं पाएंगे। फिल्म जगत की कालजयी फिल्म है- जय भीम। हिन्दी सिनेमा से अब उम्मीद रखना बेकार है और उसकी जरुरत भी नहीं है क्योंकि दक्षिण सिनेमा में इतनी शानदार और जानदार फिल्में देखने को मिल रही है। तो हिन्दी सिनेमा की कमी पूरा हो रही है।
यह फिल्म हमें भारत के उस सच से रुबरु करवाती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज करते है- जातिवाद। फिल्म दिखाती है कि किस तरह से आदिवासियों को इंसान ही नहीं समझा जाता। ऐसा लगता है जैसे वह किसी और दुनिया से है। भेदभाव के ऐसा घिनौना रुप जो हर भारतीय के लिए शर्म की बात है। फिल्म की कहानी सत्य घटना से प्रेरित है। भारत में ऐसी कई सारी अनसुनी सत्य कहानियां है। ऐसे हजारों राजकन्नू और सिंघिनी है जो अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को अपनी किस्मत मानकर झेल रहे है। समाज को बाबा साहब की विचारधारा ही सही दिशा दे सकती है।

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