जय भीम (Jai Bhim) Movie Review in hindi

      बहुत दिनों के बाद ऐसी फिल्म देखने को मिली जो अपने नाम की तरह ही ईमानदारी से फिल्माई भी गई है। फिल्म की कहानी से लेकर पृष्ठभूमि तक सब बेहतरीन है। यह फिल्म पूरे दावे के साथ कहती है कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए ही नहीं बनती है फिल्मों से हम एक अच्छे समाज का निर्माण भी कर सकते है। जय भीम फिल्म विश्व की बेहतरीन सामाजिक संदेश वाली फिल्मों में अलग स्थान रखती है। जब आप फिल्म को देखना शुरु करते है तब से जब तक फिल्म खत्म नहीं हो जाती तब तक आप अपनी नजरें फिल्म से हटा नहीं पाएंगे। फिल्म जगत की कालजयी फिल्म है- जय भीम। हिन्दी सिनेमा से अब उम्मीद रखना बेकार है और उसकी जरुरत भी नहीं है क्योंकि दक्षिण सिनेमा में इतनी शानदार और जानदार फिल्में देखने को मिल रही है। तो हिन्दी सिनेमा की कमी पूरा हो रही है। 


                                                

जय भीम- फिल्म की कहानी शुरु होती है जेल के परिदृश्य से। जहां पर जेल से छूट रहे गरीब लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा था। यह काम एक पुलिस वाला रिश्वत लेकर कर रहा होता है। जिस पुलित के ऊपर समाज की जिम्मेदारी होती है वही पुलिस वाले इस तरह का गलत काम कर रह होते है। इसी तरह फिल्म के किरदार राजकन्नू को पुलिस चोरी के झूठे इल्जाम में टार्चर करती है और उसके परिवार वालों के ऊपर भी बहुत ज्यादा जुल्म करती है। राजकन्नू की गर्भवती पत्नी को भी पुलिस नहीं बख्शती है और उसे रात में ही थाने उठाकर ले जाती है पुलिस कस्टडी में राजकन्नू की मौत हो जाती है। लेकिन पुलिस उसे छुपाती है और  बयान में कहती है कि राजकन्नू और उसके साथी पुलिस कस्टडी से फरार हो गये है। उच्च न्यायालय में मानवाधिकार के मुकदमें निशुल्क लड़ने वाले वकील जस्टिस चन्द्रू राजकन्नू का मुकदमा लड़ते है और उसकी पत्नी को इंसाफ दिलवाते है। 

        यह फिल्म हमें भारत के उस सच से रुबरु करवाती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज करते है- जातिवाद। फिल्म दिखाती है कि किस तरह से आदिवासियों को इंसान ही नहीं समझा जाता। ऐसा लगता है जैसे वह किसी और दुनिया से है। भेदभाव के ऐसा घिनौना रुप जो हर भारतीय के लिए शर्म की बात है। फिल्म की कहानी सत्य घटना से प्रेरित है। भारत में ऐसी कई सारी अनसुनी सत्य कहानियां है। ऐसे हजारों राजकन्नू और सिंघिनी है जो अपने  ऊपर हो रहे अत्याचारों को अपनी  किस्मत मानकर झेल रहे है। समाज को बाबा साहब की विचारधारा ही सही दिशा दे सकती है। 


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