सुपर-30: यह मूवी सन् 2019 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म बिहार के मशहूर शख्सियत आनंद कुमार जी की जिंदगी पर केन्द्रित है। इस फिल्म में ऋतिक रोशन लीड रोल में है अभिनेत्री मुरुनल ठाकुर है तथा आदित्य श्रीवास्तव उर्फ दया विलेन के किरदार में है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने भी उम्दा अभिनय किया है। खासकर जनता दरबार का सीन, उसमें पंकज त्रिपाठी के अभिनय की परिपक्वता झलकती है। अभिनेता ऋतिक रोशन के डायलाग फिल्म को बिहार की पृष्ठभूमि से जोड़ देते है और रिक्शा वाला सीन जिसमें रिक्शा वाला ऋतिक रोशन से कहता है कि द्रोणाचार्य अर्जुन से अधिक प्रतिभाशाली एकलव्य का अंगूठा काटकर उसके साथ अन्याय करता है। यह सीन पूरी फिल्म का बेस्ट सीन है।
फिल्म शुरु होती है अमेरिका के सभागार से। जहां पर आनंद कुमार जी एक स्टूडेण्ट फुग्गा उर्फ अज्जू के लेक्चर से। फुग्गा अपने गुरु यानि की आनंद कुमार जी के बारे में सबको बताता है। कहानी फ्लैशबैक में जाती है जहां पर ऋतिक रोशन यानि की आनंद कुमार जी को शिक्षामंत्री द्वारा रामानुजम अवार्ड से सम्मानित किया जाता है। अवार्ड मिलने पर आनंद जी बहुत खुश होते है और अपनी खुशी अपनी प्रेमिका के साथ शेयर करते है। फिल्म में आनंद जी के पिता को एक डाकिया बताया गया है और आनंद जी का ्अपने पिता के साथ मजाकिया रिश्ता भी होता है। इसके बाद आनंद जी का लेख एक किताब में छपता है और उन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से बुलावा आता है। आनंद जी अपना पासपोर्ट तैयार करवाते है। लेकिन पैसों की तंगी के कारण वह इग्लैण्ड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी नहीं जा पाते है। इसके बाद आनंद जी के पिता का देहांत हो जाता है और पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगता है। आनंद जी को पापड़ भी बेंचना पड़ता है। इसके बाद एक्सीलेंस कोचिंग सेंटर में पढ़ाने के लिए आनंद जी को आफर मिलता है। आनंद जी आफर स्वीकार कर लेते है। इसके बाद आनंद जी का जीवन आर्थिक रुप से सही होने लगता है। लेकिन एक रात लेट नाइट पार्टी से निकलने के बाद वह एक बच्चे को स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ते हुए देखते है तो उससे बात करने लगते है। तब पता चलता है कि वह बच्चा उसी पार्टी में बर्तन धोने के लिए आता है। तब एक रिक्शा वाला जो कि उस बच्चे का बाप होता है आनंद जी को घर छोड़ने के लिए जाता है और रास्ते में उस बच्चे के बारे में बातचीत होती है। तब रिक्शा वाला आज के शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष करता है। और कहता है कि राजा का बेटा ही राजा बनता है। तभी अचानक आनंद जी अपने पिता की कही हुई बात याद आती है कि अब सब बदल गया है अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा। अब राजा वही बनेगा जो हकदार होगा। इसके बाद इंटरवल हो जाता है।
इंटरवल के बाद
इंटरवल के बाद फिल्म में दिखाते है कि आनंद जी शहर में आई0आई0टी0 की प्रवेश परीक्षा के लिए फ्री कोचिंग खोलने का निर्णय लेते है। लेकिन यह बात एक्सीलेंस कोचिंग के संचालक को अच्छी नहीं लगती और आनंद जी से कोचिंग बंद करने के लिए कहते है। लेकिन आनंद जी नहीं मानते है। गांव, कस्बों और शहरों से बहुत से बच्चे आनंद जी की फ्री कोचिंग के लिए परीक्षा देते है। जिनमें से केवल 30 बच्चों को लेकर आनंद जी अपनी सुपर-30 क्लास बनाते है। कोचिंग शुरु हो जाती है लेकिन इस सबमें आनंद जी की सेविंग खत्म हो जाती है। तब मजबूरन आनंद जी को एक्सीलेंस कोचिंग संचालक यानी कि फिल्म के विलेन से शर्तों पर समझौता करते है। शर्त यह होती है कि सुपर-30 के बच्चों का और एक्सीलेंस के बच्चों का कंपटीशन होगा। अगर सुपर-30 जीतेगा तो उन्हे तीन महीने का खाना मिलेगा, यदि एक्सीलेंस के बच्चे जीतेंगे तो आनंद जी को सुपर-30 यानी की फ्री कोचिंग बंद करनी पड़ेगी। सुपर-30 के बच्चे संकोच/हेजिटेशन के कारण हार जाते है। लेकिन आनंद जी की प्रेमिका की वजह से उनकी फ्री कोचिंग क्लास बंद होने से बच जाती है। जब किसी भी तरीके से एक्सीलेंस के संचालक आनंद जी की कोचिंग नहीं बंद करवा पाते है तो उन्हे मारने का प्लान बनाते है। उन्हे एक गोली लगती लेकिन किसी तरह वह बच जाते है और अस्पताल में भर्ती हो जाते है। लेकिन एक्सीलेंस कोचिंग संचालक आनंद जी को मारने के लिए अस्पताल में गुण्डे भेजता है। अस्पताल में बच्चे अपनी सारी पढ़ाई लड़ाई में लगा देते है और लड़ाई जीत लेते है। जब आई0आई0टी0 का रिजल्ट आता है। तब आनंद जी के सुपर-30 के सभी यानी 30 बच्चे चयनित हो जाते है। और इसी के साथ यह फिल्म सबका दिल जीत लेती है।
यह फिल्म हमें शिक्षा के लिए प्रेरित करती है और सबको समान शिक्षा मिले, इस संवाद के साथ पूरी ईमानदारी करती है। यह फिल्म एक बेस्ट मोटीवेशनल फिल्म है और आपको अपने बच्चों के साथ इस फिल्म को जरुर देखना चाहिए और जिसने देखी है उन्हे दूसरो को सजेस्ट करना चाहिए।

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