गीत के बोल- जिहाल-ए-मस्कीं मकुन बा रंजिश
गीतकार - गुलजार
गायक - लता मंगेशकर-शब्बीर कुमार
संगीतकार - लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
फिल्म - गुलामी (1985)
कलाकार - मिथुन चक्रवर्ती, अनीता राज. धर्मेन्द्र, स्मिता पाटिल
निर्देशक - जे०पी० दत्ता (ज्योति प्रकाश दत्ता)
गीत
जिहाल-ए-मस्कीं मकुन बा रंजिश
बहाल-ए-हिज्रा बेचारा दिल है
सुनाई देती है जिसकी धड़कन
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है
वो आके पहलू में ऐसे बैठे
कि शाम रंगीन हो गई है
जरा-जरा सी खिली तबियत
जरा सी गमगीन हो गई है
अजीब है दिल के दर्द यारों
न हो तो मुश्किल है जीना इसका
जो हो तो हर दर्द एक हीरा
हर एक गम है नगीना इसका
कभी-कभी शाम ऐसे ढलती है
जैसे घूंघट उतर रहा है
तुम्हारे सीने से उठता धुंआ
हमारे दिल से गुजर रहा है
ये शर्म है, या हया है, क्या है
नजर उठाते ही झुक गई है
तुम्हारी पलकों से गिर के शबनम
हमारी आँखों में रुक गई है
Note- इस गाने की पहली लाइन का मतलब है कि "इस लाचार (मस्कीं) दिल को जब देखो (जिहाल) तो गुस्से से (बा-रंजिश) मत (मकुन) देखो इस बेचारे दिल को हाल ही में (ब-हाल) अपने महबूब से जुदाई (हिज्र) का गम मिला है।

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