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जिन्दगी एक सफर की तरह ही है जहां बस चलते रहना है, रुकना नहीं है। जिन्दगी एक आइसक्रीम की तरह भी है जिसे आपको समय रहते खाना है नहीं तो वह पिघल रही है। आजकल की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी बिल्कुल हाइवे के समान है। जहां पर हर कोई बस, कार, मोटरसाइकिल या फिर पैदल सफर कर रहा है। फुटपाथ पर चलने वाला व्यक्ति मोटरसाइकिल पर चलने वाले व्यक्ति के साथ दौड़ रहा है मोटरसाइकिल पर चलने वाला व्यक्ति कार में चलने वाले के साथ रेस कर रहा है। इस पूंजीवादी व्यवस्था में हर व्यक्ति दौड़ रहा है और हर किसी को एक-दूसरे से आगे निकलने को होड़ लगी हुई है। पैदल चलने वाला व्यक्ति अगर लगातार चलता रहे तो वह मोटरकार वालो से भी आगे निकल सकता है। क्योंकि कछुए और खरगोश की रेस में जीत हमेशा कछुए की ही होती है। इसलिए हमेशा चलते रहना चाहिए। किसी कवि ने क्या खूब कहा है कि "एक रास्ता है जिन्दगी, जो थम गये तो कुछ नहीं"।

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