उच्च न्यायालय इलाहाबाद में क्लर्क की परीक्षा का परिणाम आये हुए लगभग चार महीने होने वाले थे लेकिन अभी तक विभाग की तरफ से कोई ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला था। स्नातक की परीक्षा पास किए हुए गौरव को चार साल हो चुके थे लेकिन अब जाकर उसे सफलता मिली थी। घर वाले पहले से ही कह दिए थे कि सरकारी नौकरी के अलावा कुछ और नहीं करना है अगर घरवाले उस पर ऐसा बाउण्डेशन न रखे होते तो शायद गौरव कहीं और होता अपने सपनों की दुनिया में।
गौरव को बचपन से ही फिल्मे देखना बहुत अच्छा लगता था जो शायद हर बच्चे को पसंद है। लेकिन उसे फिल्मों के साथ-साथ मुम्बई भी पसंद आने लगी थी वह अपने मन में मुंबई जाने का सोच भी लिए थे। लेकिन पिताजी की सरकारी नौकरी के रहते उनकी सोच भी सरकारी हो गई थी और उनका कहना था कि सरकारी नौकरी से अच्छी कोई नौकरी नहीं। अच्छा पैसा और आराम कहां मिलेगा सरकारी नौकरी के अलावा, बात तो सही थी गौरव के पिताजी की। लेकिन गौरव के भी कुछ सपने थे। उसने बचपन में सोचा था कि वह चोरी से मुम्बई भाग जाये लेकिन दिल गवाही नही दिया क्योंकि वह घर का अकेला था उसके मां-बाप को उसके अलावा कोई संतान न थी। इसलिए मां-बाप का मोह कुछ ज्यादा ही था और वह भी उनका दिल नहीं तोड़ना चाहता था। इसलिए वह अपने सपनों की तिलांजलि देकर अपने मां-बाप का सपना पूरा करने में जुट गया और आज परिणाम देखकर सब लोग बहुत खुश थे। हालांकि उसे इस नौकरी को ज्वाइन करने में उतनी खुशी नहीं थी जितनी उसके घरवालों को थी।
गौरव अभी तक इलाहाबाद के बाहर केवल प्रतियोगी परीक्षा के लिए ही निकला था। लेकिन आज गौरव का चयन इलाहाबाद उच्च न्यायालय की अधीनस्थ अदालत रायबरेली में हुआ। दो दिन बाद ज्वाइन करना था इसलिए गौरव एक दिन पहले ही रायबरेली आ गया था। गौरव ने चयन सूची से रायबरेली में चयनित हुए कुछ दोस्तो के मोबाइल नम्बर मिल गये उनसे सम्पर्क कर मुलाकात किया।
ज्वाइनिंग वाले दिन सुबह नहा-धोकर फोन पर मां और पिता का आशीर्वाद लेकर गौरव आफिस पहुंचा। आफिस पहुंचकर नये दोस्तो मिलकर एक कमरे में जाकर बैठ गया। थोड़ी देर में कमरे में एक लड़की नें कदम रखा, शायद उस लड़की का चयन क्लर्क के पद पर हुआ था। गौरव उसे एकटक देखता रह गया। सफेद सलवार- कुर्ता के ऊपर लाल रंग का दुपट्टा पहने शिवन्या गौरव को किसी कयामत से कम नहीं लगी। गौरव उसकी काली जुल्फों से झांकते चांद जैसे चेहरे पर से अपनी नजर नहीं हटा पा रहा था। गौरव को अब यहां पर आना अपनी किस्मत का खेल समझ रहा था और मन ही मन ऊपर वाले का शुक्रिया अदा कर रहा था।
हालांकि उस दिन ज्वाइनिंग की वजह से उसे फुर्सत ही नहीं मिली कि वह शिवन्या से बात करे। शिवन्या ने तो शायद गौरव की तरफ देखा भी नहीं था लेकिन गौरव को इसकी परवाह नहीं थी। वह अब खुद को रोमियो और शिवन्या को अपनी जूलियट बनाने के सपने देखने लगा। अगले दिन आफिस उसे एक पत्र लेखन का कार्य मिला उसने पत्र टाइप किया और साइन होने के बाद पत्र को पोस्ट करना था। डायरी डिस्पैच का कार्य शिवन्या कर रही थी अब तो गौरव इसे अपनी खुशकिस्मती समझने लगा और बार-बार ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने लगा इसी बहाने वह अब शिवन्या से बात कर सकता था।
गौरव आफिस पत्र लेकर शिवन्या के पास पहुंचा। शिवन्या को हैलाे कहते हुए उसने स्माइल दिया और शिवन्या ने भी स्माइल दिया और पूछा- जी कहिए क्या बात है। गौरव ने शिवन्या की तरफ पत्र बढ़ाते हुए कहा- इसे डिस्पैच कर दो आज ही पोस्ट करना है। शिवन्या ने गौरव के हाथ से पत्र लेकर तुरन्त काम कर दिया और वापस गौरव की तरफ पत्र बढ़ाते हुए कहा- जी, पत्र डिस्पैच हो गया। गौरव ने पत्र डिस्पैच करते हुए कम से कम हजार बार शिवन्या की तरफ देखा होगा। शिवन्या को देखते ही गौरव की दिल की धड़कन एकदम से बढ़ जाती थी और वह न चाहते हुए भी उसकी तरफ खिंचा चला जाता था।
गौरव का शिवन्या की तरफ आकर्षित होना लाजिमी था क्योंकि शिवन्या बला की खूबसूरत थी। उसके तीखे नैन-नक्श और उसके गाल पर लटकती वह काली जुल्फ कातिलाना लगती। गौरव ने बिना कोई समय गवाएं शिवन्या को काफी का आफर दे दिया। हालांकि गौरव को पता था कि शिवन्या मना कर देगी। लेकिन गौरव की खुशी का ठिकाना न रहा जब शिवन्या ने उसके काफी के आफर को स्वीकार कर लिया।
वह शिवन्या को रायबरेली के सबसे अच्छे रेस्टोरेंट में ले गया और फिर दोनो ने काफी बातचीत किया। शिवन्या लखनऊ से थी उसकी यह दूसरी जाॅब थी इसके पहले वह बिजली विभाग में क्लर्क थी। शिवन्या अभी लखनऊ से अपडाउन कर रही थी तो गौरव ने उसे समय की महत्व बताते हुए रायबरेली मे ही कमरा लेकर रहने की सलाह दिया। हालांकि यह सलाह गौरव शिवन्या को इसलिए भी दे रहा था ताकि वह शाम को आफिस के बाद भी शिवन्या के साथ किसी रेस्टोरेंट में बैठकर बात कर सके।
अब लगभग एक महीना हो चुका था। गौरव और शिवन्या की दोस्ती धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी। वह अब रोज आफिस के बाद भी मिलने लगे। कभी कैदी किचन रेस्टोरेंट में कढाई पनीर तो कभी बटी रेस्टोरेंट में सैण्डविच खाते। एक दिन गौरव किसी काम से शिवन्या के साथ उसके रुम पर चला गया। लेकिन यह बात शिवन्या के रुम आनर को पसंद नहीं आई और उसने शिवन्या से इस बारे में बात किया। शिवन्या और गौरव केवल अच्छे दोस्त थे लेकिन उसके रुम आनर द्वारा कही बातो ने शिवन्या के दिल में हलचल पैदा कर दी।
अब शिवन्या और गौरव एक- दूसरे को काफी पसंद करने लगे थे। लगभग 6 महीने हो रहे थे वेलेंटाइन डे आने वाला था गौरव ने वेलेंटाइन डे पर शिवन्या को प्रपोज किया और शिवन्या ने भी खुशी-खुशी गौरव का प्रपोजल स्वीकार कर लिया। अब तो गौरव की खुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने मन ही मन अपने माता-पिता का लाखो बार शुक्रिया अदा किया और शिवन्या को अपना गोद में उठा लिया। पार्क में बैठे सारे कपल गौरव और शिवन्या को देखकर तालिया बजाने लगे। शिवन्या भी बहुत खुश थी क्योंकि उसे गौरव जैसा चाहने वाला हमसफर मिला।
आफिस से दो दिन की छुट्टी लेकर गौरव शिवन्या को लेकर इलाहाबाद अपने माता-पिता से मिलाने के लिए गया। शिवन्या गौरव के माता-पिता को काफी पसंद आयी। अगले महीने ही गौरव अपने मम्मी पापा के साथ शिवन्या के घर लखनऊ गया। शिवन्या के घरवालो ने गौरव को काफी पसंद किया। पसंद भी क्यों न करें एक तो गौरव दिखने में तो अच्छा था ही और उस पर सरकारी नौकरी वाला दामाद तो सबकी पहली पसंद होती है।
गौरव और शिवन्या की शादी की बात पूरे स्टाफ में फैल गई। लड़किया शिवन्या को और लड़के गौरव को कह रहे थे कि- क्या किस्मत है पायी तुमने। साथ में काम करने वाला अगर लाइफ पार्टनर बन जाए तो क्या बात है। शिवन्या और गौरव ने अपनी शादी लखनऊ के सबसे अच्छे मैरिज हाल की। शादी के बाद गौरव और शिवन्या हनीमून के लिए शिमला गये। हनीमून से लौटने के बाद गौरव और शिवन्या ने पूरे स्टाफ मिठाई बटवाई और सबने गौरव और शिवन्या के उज्जवल भविष्य का कामना की।
------------अमित कुमार--------------

2 Comments
Good story
ReplyDeleteThank you
Delete